वैसे तो प्रेम कहानियां कई तरह की हैं जैसे- सुलक्षणा-अमर की, राधा- निशांत की, सोणी-भारद्वाज
की आदि-आदि . क्या सुना नहीं! ताज़ुब्ब है! छोडिये जाने दीजिये . आज मैं आपको एक ऐसी प्रेमकहानी सुनाऊंगा जिसे सुनकर आप गुनगुना उठेंगे अरे-अरे ! यूँ न मुहं बिचकाएं ये ऐसी-वैसी प्रेमकहानी नहीं है भई, कुछ खास है इसमें, कुछ बात है इसमें. अब आप कहेंगे कि भला ऐसा क्यों !, अरे भईया! यदि राजश्री बैनर को पता चलेगी यह कहानी तो फिर इसी कहानी को आप १००-१०० रुपये खर्च करके देखेंगे और वाह!वाह! कहेंगे.
.....तो बिना ढेंन-ढेंन किये लड़के का हुलिया आपके सामने प्रस्तुत है, कद लम्बाई से थोडा छोटा , चेहरा सुन्दर से थोडा कम, चेहरे पे चश्मा, रंग गोरापन का आभास देता. कुल मिलाकर एक ही लड़का !
लड़का बहुत दिनों से अपने अमर प्रेम की खोज में लगा था. पढने में तो बिलकुल ही ठीक था. मैट्रिक घींच-घांचकर सेकंड डिविजन से पास कर ली थी, अब अपने अ.प्रे. की खोज में अध्यनरत था. जैसा की आपने ठीक अनुमान लगाया, उसके घर के सामने नहीं ! बगलवाले घर में एक लड़की का आगमन हुआ. पान खाइएगा ? नहीं, जरा हमको खा लेने दीजिये . तो लड़काss अपने लड़कपन की पूरी जवानी पे था. उसके दोस्त उसकी भाग्यता(?) पर जल-जल कर रोज उसके घर आते, और आहें भरते की काश! उनका घर भी उसी मोहल्ले में होता. तो ज़नाब बात उन दिनों की है जब आसमान पर कमीनेपन के बादल नहीं मंडराते थे, लोग सच्चे और मकान कच्चे हुआ करते थे. लड़के का एक सच्चा दोस्त भी था, सारे दोस्तों के होने के बावजूद.
हें! हें! हें ! क्या कहूँ ज़नाबे-हाजरीन ! अब अपनी तारीफ खुद ही करते अच्छा नहीं लगता मगर फिर भी बताये देता हूँ , उस लड़के का सच्चा दोस्त मै ही हूँ . आगे की डासटान! क्ष्मा कड़ेंगे डरा ठूक लेने दें...हाँ! अब ठीक है . तो मै कहाँ था? हाँ! याद आया दास्ताने मोहब्बत का चश्मदीद आपके सामने पेश करता है
जनवरी का महिना:
लड़की अपने बरामदे में सिलाई मशीन पर झुकी हुई थी और कुछ खटर-पटर करती सिलाई जैसा ही कार्य कर रही थी. लड़का अपने हाते में अपने सच्चे दोस्त के साथ खड़ा नयन सुख का मज़ा लूट रहा था.जबकि लड़की उसके चलायमान शरीर के इशारों से वाकिफ थी. स.दो. ने लड़के के कान में कुछ फुसफुसाया, लड़का डरकर नहीं-२ कहने लगा, स.दो. ने आँखे तरेर के कहा- तो साले! मै ही..तब जाकर लड़के को ताव आया, जैसा की उस उम्र में आता ही है (देरसबेर), लड़का अपने घर के अन्दर गया, अपनी काँपी का एक पन्ना फाड़ा और उसपे अंग्रेजी के हर्फों में शाश्वत वाक्य लिखा- I LOVE YOU !,और लड़की से बोला- ज़रा छत पर आएँगी क्या ? क्या काम है? लड़की ने पूछा, काम तो जरुरी है तभी तो आपको बुला रहा हूँ. लड़की छत पर आयी तब लड़के ने कहा-आपको एक चीज़ दिखानी है, दिखाइए! लड़की बोली, पता नहीं क्या हुआ एकदम से लड़के का कंठ सूख गया मुंह से आवाज़ निकलनी बंद हो गई, चुपचाप कागज़ का टुकड़ा आगे बढ़ा दिया, "आइये ज़नाब यहाँ इस पत्थर पर बैठ जाते हैं, तो कहिये कैसा लग रहा है , क्या? मज़ा नहीं आ रहा ? थ्रिल नहीं है ? अमाँ यार! अभी तो आपसे बहस की गुंजाइश बन पड़ी है, वो कैसेss? वो ऐसे कि, हम आज भी संस्कृति-२ को भज रहे हैं और लड़का है कि लड़की को (ध्यान दीजियेगा ज़नाब: लड़की को..) वो भी अंग्रेजी में I LOVE YOU कह रहा है वो भी उस सड़े-गले मोहल्ले में, तो आइये हम इस अंग्रेजी-दां प्रणय-निवेदन के खिलाफ एक मोर्चे का गठन करते हैं. "अरे यार ये कहाँ ले उड़े बात को? अरे भैया, बात को हम नहीं उड़ाते बात तो अपनेआप उड़ जाती है, अब देखिये न ! लड़की ने कागज़ पर नज़र दौड़ाई और मुस्कुरा कर बोली-मुझे अंग्रेजी नहीं आती. लड़के को उसके अंग्रेजी न आने से ज्यादा ख़ुशी उसकी मुस्कराहट से हुई, उसने कहा आप एक मिनट रुकिए और वह दौड़ कर नीचे गया कांपते हाथो से उसने हिंदी में लिखा -मैं तुमसे प्यार करता हूँ ! (और जैसे ही लड़के ने इस संस्कृतिमय भाषा का उपयोग किया आकाश से फूल बरसने लगे और साधु!साधु! की आकाशवाणी होने लगी.) और दौड़कर वापस छत पर आया और लड़की को उसने कागज़ सौंपा. लड़की ने कागज़ पढ़ा और लेकर नीचे चली गई. "अब श्रीमंत एक चाय का दौर हो जाये, बोलते-बोलते थक गया हूँ .
अच्छा साहबान ! चाय पीते-पीते हम एकाध जरुरी और गैरजरूरी बातों पर ध्यान दे सकते हैं, वो क्या ? ज़नाब देखा जाये तो यह 'प्रेम या प्यार' जो चीज़ है अच्छों -अच्छों का हाजमा बिगाड़ के रख देती है , वो कैसे ? "ज़नाब आपने कभी किसी से प्यार किया है "? नहीं तो.!...तब कैसे पता चलेगा !- एक कविता सुनाने की गुस्ताखी कर रहा हूँ
मेरा प्रेम नदी नहीं, सागर नहीं
दलदल है
पड़ना है यदि मेरे प्रेम में
तो घुसना पड़ेगा इसमें
और एक बार घुस के चाहोगे
निकलना तो और धंसते जाओगे
मेरे प्रेम के दलदल में..
" अमाँ क्या सुनाने लगे तुम भी यह अच्छी भली प्रेमकहानी सुनाते-सुनाते ? आगे क्या हुआ बताओ तो ! हाँ भैया सुनाता हूँ ! मगर एक बात बताओ किसी दूसरे की प्रेमकहानी में किसी को क्या मज़ा आता होगा? "आता है न ! जैसे कहानी में मज़ा आता है, फिल्म में मज़ा आता है उसी तरह मुझे इसमें मज़ा आ रहा है." देखो बातों में वक़्त जाया न करो, आगे क्या हुआ बताओ ? तनिक ठहरो बाबू मोशाय! पहले यह गाना सुनो :
http://www.dishant.com/jukebox.php?songid=55947५५९४७ कैसा लगा ? हाँ ss ठीssक है , मगर तुम बीच में ब्रेक क्यों ले रहे हो?
ज़नाब मुझे अपराधबोध हो रहा है! क्यों ? दरअसल मैं प्रेमकहानी सुनाते-सुनाते यह भूल गया कि, यह प्रेमकहानी सिर्फ लड़के की ही नहीं बल्कि एक लड़की की भी तो है, अरे भई ! एक ही तो बात है, नहीं ss एक ही बात नहीं है बाबू मोशाय!.. भला आप क्या जाने एक लड़की के मन की व्यथा ! अच्छा आप ही बताएं, आपने कितनी लड़कियों की प्रेम-गाथा सुनी है ? ज़नाब लड़कियों का प्रेम कुचल दिया जाता है हमारे ही द्वारा ! कितने ही सुन्दर चेहरे तेजाब से बर्बाद हो जाते हैं हम पुरुषों का प्रेम नहीं स्वीकारने के चलते, न जाने कितने ही जतन से किसी लड़की के मन में प्यार का अंकुर फूटता है, बड़े ही अरमानों से लड़की उस प्रेम के अंकुर को अपने मन में सींचती रहती है, और जब वक़्त आता है फूल खिलने का तो तरह-तरह की सामाजिक बाधाएं....(शेष अगली पोस्ट में )


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