मेरे बच्चे! मैं हूँ तुम्हारा पिता. पिता होना सबके बस कि बात नहीं. अभी मैं जो कुछ भी लिखूंगा उसे तुम पिता बनकर ही समझ पाओगे. पिता विशाल पेड़ सदृश्य होते हैं. बच्चे उसकी छाया में निश्चिन्त होकर फलते-फूलतें हैं. हालाकि बच्चे तो स्वाभाविक तौर पर अपनी माता के दुलारे होते हैं, और मां के आँचल से निकले तो दादा-दादी और बुआ के स्नेह में पगते रहते हैं. मगर इन सारे रिश्तों में पिता को गंभीर मानकर छोड़ दिया जाता है (Father Hardstone), लगता है पिता का दिल धड़कता ही नहीं? कुछ पिता अपनी डिग्निटी को मेंटेन करने में ही तस्वीर बनके अपने बच्चों के सामने लटक जाते हैं. आम तौर पर पिता की तमाम उम्र परिवार को चलाने की जोड़-तोड़ में जाया हो जाती है, पिता को अपने सारे बच्चों पर एक समान ध्यान रहता है. ऐसे में कोई शिकायत करे तो भला पिता क्या करे? अब मुझे लो, बिजनेस में उतार के कारण तानावग्रसित हूँ मगर मै तुमसे बाँट नहीं सकता क्योंकि तुम बहुत छोटे हो, और जब तुम बड़े हो जाओगे, तब मैं अपने 'पितास' (एक तरह का स्वाभिमान) को मेंटेन करने में लग जाऊंगा, तुम इज्ज़त करने में.
बेटा! क्या तुममें और मुझमे 'दोस्ती' का रिश्ता नहीं पनप सकता? तुम सोचोगे कि, मुझमे और दादाजी में यह रिश्ता नहीं पनपा तो आगे कैसे...? बेटे! तुम्हारे दादाजी का वक़्त दूसरा था, और मुझे उनसे कोई शिकायत भी नहीं. जबकि मेरी पीढ़ी ने संतुलन बनाना सीख लिया है.
खैर, मेरे बच्चे! ईश्वर करे की कभी तुम्हें अपनी भावनाओं को बाँटने के लिए अपने पिता की जरुरत हो और मैं जरुर से जरुर तुम्हारे पास मौजूद रहूँ .मेरे बच्चे! पता नहीं उस खास वक़्त में मैं होऊंगा या नहीं, मगर मेरा आशीर्वाद और प्यार सदा तुम्हारे पास बना रहेगा और यह तुम्हारे धैर्य की शक्ति के परीक्षण का समय भी होगा जो मैं इस वक़्त तुम्हारी शिक्षा के माध्यम से तुम्हें सिखा रहा हूँ...अभी ऐसे वक़्त में जब मेरे धैर्य परीक्षण की बारी चल रही है, हो सकता है कि, मैं तुम्हारी सारी ज़रूरतों को पूरा न कर सकूँ क्योंकि इस वक़्त मेरा सारा ध्यान परिवार का खर्च चलने में है, जिसमे सबसे ज्यादा ज़रूरी तुम्हारी पढाई की फीस है. शिक्षा जो तुम पा रहे हो, जो बाँटने पर भी ख़त्म नहीं होती. एक यही चीज़ ऐसी होगी जिसे तुम मरकर भी अपने साथ ले जा सकोगे. मेरे बेटे! मैं जानता हूँ कि, तुम्हें अभी ढेर सारी चीज़ों कि ज़रूरत है, मगर अफ़सोस कि, वर्तमान आमदनी में मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी नहीं कर सकता. मगर मुझे ख़ुशी होगी कि तुम अपनी शिक्षा अच्छी तरह पूरी करो और बाद में जब कभी पिता बनो तो ऐसे बच्चे के पिता बनो जिसकी हर ख्वाहिश तुम पूरी कर सको.......आमीन!

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