पिछले रविवार को "हाउसफुल" देखने गया था. पिक्चर देखने के लिए बेटे से पूछा तो उसने मुहँ बिचका दिया. फिल्म की कहानी ऐसी है कि, एक अभागा मगर सच्चा इन्सान है अक्षय कुमार जो न चाहते हुए भी ढेर सारी मुसीबतों में घिर जाता है. इस तथाकथित हास्य फिल्म में एक ऐसा जीवंत हास्य दृश्य आता है जब फिल्म में सारे कलाकार हँसते हैं और दर्शक दृश्य को
समझने में चुपचाप बैठे रहते हैं मैंने उसी वक्त पैसे कि परवाह न करते हुए हाल से बाहर आने में ही अपनी भलाई समझी. बाहर
बड़ी भीड़ थी पुलिस वाले भीड़ को सँभालने में लगे थे. ये सारे लोग वो थे जो इस तनाव भरी जिंदगी में थोडा मनोरंजन खोजने
सपनीली दुनिया में जाने कि ख्वाहिश रखते थे उन्हें क्या पता कि २५ रुपये में मनोरंजन अब महंगा हो गया है.
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें