मै सिर्फ पेड़ था चन्दन की सोहबत में पड़ा चन्दन बनकर बिगड़ा, लोहा था पारस की संगत में पड़ा
सोना बनकर बिगड़ा, मै सिर्फ पानी था गंगा में मिला गंगाजल बनकर बिगड़ा।
देखना मेरे भाई, कहीं तुम भी मेरी सोहबत में पड़कर बिगड़ मत जाना -कबीर
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